Friday, 26 February 2016

What Congress Did for INDIA ????



सही बात है, मोदी जी ने कुछ काम नही किया है |
देखो हर साल कांग्रेस कितना काम करती थी,

  1. 1987 - बोफोर्स तोप घोटाला, 960 करोड़
  2. 1992 - शेयर घोटाला, 5,000 करोड़।।
  3. 1994 - चीनी घोटाला, 650 करोड़
  4. 1995 - प्रेफ्रेंशल अलॉटमेंट घोटाला, 5,000 करोड़
  5. 1995 - कस्टम टैक्स घोटाला, 43 करोड़
  6. 1995 - कॉबलर घोटाला, 1,000 करोड़
  7. 1995 - दीनार / हवाला घोटाला, 400 करोड़
  8. 1995 - मेघालय वन घोटाला, 300 करोड़
  9. 1996 - उर्वरक आयत घोटाला, 1,300 करोड़
  10. 1996 - चारा घोटाला, 950 करोड़
  11. 1996 - यूरिया घोटाला, 133 करोड
  12. 1997 - बिहार भूमि घोटाला, 400 करोड़
  13. 1997 - म्यूच्यूअल फण्ड घोटाला, 1,200 करोड़
  14. 1997 - सुखराम टेलिकॉम घोटाला, 1,500 करोड़
  15. 1997 - SNC पॉवेर प्रोजेक्ट घोटाला, 374 करोड़
  16. 1998 - उदय गोयल कृषि उपज घोटाला, 210 करोड़
  17. 1998 - टीक पौध घोटाला, 8,000 करोड़
  18. 2001 - डालमिया शेयर घोटाला, 595 करोड़
  19. 2001 - UTI घोटाला, 32 करोड़
  20. 2001 - केतन पारिख प्रतिभूति घोटाला, 1,000 करोड़
  21. 2002 - संजय अग्रवाल गृह निवेश घोटाला, 600 करोड़
  22. 2002 - कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज घोटाला, 120 करोड़
  23. 2003 - स्टाम्प घोटाला, 20,000 करोड़
  24. 2005 - आई पि ओ कॉरिडोर घोटाला, 1,000 करोड़
  25. 2005 - बिहार बाढ़ आपदा घोटाला, 17 करोड़
  26. 2005 - सौरपियन पनडुब्बी घोटाला, 18,978 करोड़
  27. 2006 - ताज कॉरिडोर घोटाला, 175 करोड़
  28. 2006 - पंजाब सिटी सेंटर घोटाला, 1,500 करोड़
  29. 2008 - काला धन, 2,10,000 करोड
  30. 2008 - सत्यम घोटाला, 8,000 करोड
  31. 2008 - सैन्य राशन घोटाला, 5,000 करोड़
  32. 2008 - स्टेट बैंक ऑफ़ सौराष्ट्र, 95 करोड़
  33. 2008 - हसन् अली हवाला घोटाला, 39,120 करोड़
  34. 2009 - उड़ीसा खदान घोटाला, 7,000 करोड़
  35. 2009 - चावल निर्यात घोटाला, 2,500 करोड़
  36. 2009 - झारखण्ड खदान घोटाला, 4,000करोड़
  37. 2009 - झारखण्ड मेडिकल उपकरण घोटाला, 130 करोड़
  38. 2010 - आदर्श घर घोटाला, 900 करोड़
  39. 2010 - खाद्यान घोटाला, 35,000 करोड़
  40. 2010 - बैंड स्पेक्ट्रम घोटाला, 2,00,000 करोड़
  41. 2011 - 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, 1,76,000 करोड़
  42. 2011 - कॉमन वेल्थ घोटाला, 70,000 करोड़
राम मंदिर और पेट्रोल पर रो रहे हो, इनमे से 5 के नाम भी पता थे क्या |
वो बेचारा अकेला इतनी मेहनत कर रहा है, पर आपकी आदत है न हर चीज में डंडा करने की | अगर ये तंग आकर हट गया न तो, आपको फिर यही कांग्रेस मिलेगी | जितने भी उसके बाहर घूमने से परेशान है, वो बाहर छुट्टियाँ नही मना रहा है(राहुल जी की तरह) | सुरक्षा मजबूत कर रहा है अपने देश की | आज तुम सबको को किसान दिख रहे, हैं और जब यूरिया और खाद घोटाला हुये तो, कुछ नही दिखा |
नींद से जागो और लोगों को भी निंद से जगाओ |
मोदीजी को प्रधानमंत्री बने, २ वर्ष भी नहीं हुआ की, अच्छे दिन का ताना मारने लगे हैं कुछ लोग | वो लोग जर इनका भी कार्य काल देखो, और इन्होने क्या क्या किया हैं सोचो |
  1.  जवाहरलाल नेहरु, 16 वर्ष 286 दिन
  2.  इंदिरा गाँधी, 15 वर्ष 91 दिन
  3.  राजीव गाँधी, 5 वर्ष 32 दिन
  4.  मनमोहन सिंह, 10 वर्ष 4 दिन
कुल मिला कर 47 वर्ष 48 दिन में अच्छे दिन को ढूंढ नहीं सके और डेढ़ वर्ष में हीं अच्छे दिन चाहिए |
ये कैसा न्याय है ???
ये कैसी राष्ट्रभक्ति है ???
मेरी भारतवासियों से यही नम्र विनती हैं कि, अच्छे दिन चाहिये तो थोडा सब्र करो, धैर्य रखो|
जय हिन्द॥

Wednesday, 24 February 2016

आरक्षण नामक अभिशाप.....

आरक्षण नामक अभिशाप .....  



आरक्षण के सन्दर्भ में आज जिस वीभत्स, घिनौनी और गैर सामाजिक घटना को अंजाम दिया गया है उसके मद्देनजर अब आवश्यक हो गया है की भारत वर्ष के संविधानं से हर प्रकार के आरक्षण की व्यवस्था को अविलम्ब समाप्त कर दिया जाए. अन्यथा भारत का हर तबका निक्कम्मेपन का शिकार हो जाएगा और मुफ्त की रोटी प्राप्त करने के लिए देश के अमूल्य संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचाकर आरक्षण प्राप्त करने के लिए सरकार पर अनावश्यक दवाब बनाने का कुत्सित प्रयास करता रहेगा.

क्षमा चाहता हूँ अपनी धृष्टता के लिए और मै अपने देश के सभी अदूरदर्शी राजनेताओं को एक सलाह देना चाहता हूँ. हे मेरे देश के अदुरदर्शी राजनेताओं जब आप सबने यह सोच ही लिया है की सत्ता पर काबिज होने के लिए आप सब किसी भी हद तक जा सकते हो, यहाँ तक की पाकिस्तान की शरण में भी, तो आप लोगों को मेरी एक सलाह है की "ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और ऐसे ही कुछ अन्य गिने चुने सवर्णों को छोड़कर अन्य तमाम जातियों के सर पर आरक्षण का मुकुट पहना दीजिये". इससे और कुछ हो या न हो परन्तु इतना तो अवश्य ही होगा कि हमारे देश के अनमोल संसाधनों को रह-रह कर आग के हवाले किये जाने से बचाया जा सकता है साथ ही साथ आप लोगों को देश में अशांति फैलाने, सामाजिक विद्वेष पैदा करने आदि में यदा कदा जो श्रम करना पड़ता है वह भी बच जायगा.

भारत और महाभारत

भारत और महाभारत


**दुर्योधन और राहुल गांधी -
दोनों ही अयोग्य होने पर भी सिर्फ राजपरिवार में पैदा होने के कारन शासन पर अपना अधिकार समझते हैं।

**भीष्म और आडवाणी -
कभी भी सत्तारूढ़ नही हो सके फिर भी सबसे ज्यादा सम्मान मिला। उसके बाद भी जीवन के अंतिम पड़ाव पे सबसे ज्यादा असहाय दिखते हैं।


**अर्जुन और नरेंद्र मोदी- 
दोनों योग्यता से धर्मं के मार्ग पर चलते हुए शीर्ष पर पहुचे जहाँ उनको एहसास हुआ की धर्म का पालन कर पाना कितना कठिन होता है।


**कर्ण और मनमोहन सिंह -
बुद्धिमान और योग्य होते हुए भी अधर्म का पक्ष लेने के कारण जीवन में वांछित सफलता न पा सके।


**जयद्रथ और केजरीवाल- 
दोनों अति महत्वाकांक्षी एक ने अर्जुन का विरोध किया दूसरे ने मोदी का। हालांकि इनको राज्य तो प्राप्त हुआ लेकिन घटिया राजनीतिक सोच के कारण बाद में इनकी बुराई ही हुयी।


**शकुनि और दिग्विजय- 
दोनों ही अपने स्वार्थ के लिए अयोग्य मालिको की जीवनभर चाटुकारिता करते रहे।

**धृतराष्ट्र और सोनिया -
अपने पुत्र प्रेम में अंधे है।

**श्रीकृष्ण और कलाम-
भारत में दोनों को बहुत सम्मान दिया जाता है परन्तु न उनकी शिक्षाओं को कोई मानता है और न उनके बताये रास्ते का अनुसरण करता है।

Secularism or Simply Politics.....????

Secularism or Simply Politics ....????

"Secularism is a belief system that rejects religion, or the belief that religion should not be part of the affairs of the state or part of public education."
Dear friends this the actual definition of Secularism as per dictionary.
But in our India, Secularism is defined by our MC politicians as below -
"Secularism is a belief system that supports Muslims (either he is on wrong,  illegal and anti-national path) & dismember, subjugate, dismantle Hindus at any cost and the belief that Hindu, specially so-called upper cast should not be part of the affairs of the state or part of public education."

मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ की कुछ ******* की औलादें ये कैसे बोल रहें हैं की भारत में शिक्षा का भगवाकरण हो रहा है? न तो शिक्षा मंत्रालय की तरफ से कोई नया अध्याय जोडा गया है किसी कक्षा में, न तो किसी हिन्दू महामानव की जीवनी ठुंसी गई है किसी पाठ्यक्रम में और न ही किसी को जबरन आरएसएस की वर्दी पहनाई जा रही है इस देश में. 

नेताजी की होली

नेताजी की होली
रंग बदलने के कला में निपुण,
रंगबाजी विशेष जिनका गुण !
देश लूटने को मदहोश,
वादों की नौका लिए सफ़ेद पोश !
एक नेताजी होली खेलती भीड़ में शरीक हो गए,
प्रश्न पत्र सा, मानो लीक हो गए !
नोग नेताजी के महान तेवर देख कर चौंके,
इस दृश्य को देख कर कुत्ते भी भौंके !
तभी भीड़ से एक आदमी बोला-
"नेताजी आज बिना मौसम ही आपकी नीयत डोली है,
नेताजी बोले-
"बुरा न मानो होली है !!! "
अबीर-गुलाल से शुरुआत हुई,
पिचकारी भर रंगों के बरसात हुई !
फिर अथिति देवो भवः की गयी सभ्यता निभायी,
मिलकर सबने नेताजी की होली मनाई !
शर्मा जी का बीटा ग्रीज़ का डब्बा लाया,
यादव जी ने पास पड़ा गोबर उठाया !
श्रीवास्तव जी ने और भी किया कमाल,
महीने भर के सड़े टमाटरों का किया इस्तेमाल,
सिंह जी के पोते ने गजब ही कर दिया !
इतने में नेताजी थक कर चूर थे,
पर क्या करते मजबूर थे !
घंटों तक चली पूजा-आरती में,
भक्तगण पीछे और नेताजी आगे !
किसी तरह नेताजी, दुम दबा कर भागे !
रंग छुड़ाने में हुआ और भी बुरा हाल,
फिर भी रह गया कुछ पीला, कुछ नीला,
कुछ कला, कुछ लाल !


Tuesday, 23 February 2016

राजनीति

राजनीति

यह है २१वि सदी,
जहाँ बह रही है राजनीति की नदी !
इस सदी में बदला हा राजनीतिक समीकरण,
कई दलें कर रहीं हैं, एक - दूसरे का अनुकरण !
कोई दल कहे हम हैं 'आप' ,
कोई कहे आप हैं श्राप !
कुछ मंत्री लगाएं जनता दरबार ,
कुछ कहें करें विकास से प्यार !
सबके हैं अपने - अपने वायदे चुनावी,
देखना तो यह है की कौन है सबसे मेधावी !
पर इस बीच कुछ नेता धो रहे हैं , बहती गंगा में हाथ,
कर रहे हैं तीसरे मोर्चे की बात !
सब निकालते हैं बाल की खाल,
कोई नहीं जानना चाहता जनता का हाल !
सवाल करने का भी आखिर क्या है फायदा,
मिलता भी है तो सिर्फ चुनावी वायदा !

जब मंत्रियों में मंत्रालय बटी ,
तब एक ऐसी ही घटना घटी !
लोग पहुंचे प्रधानमंत्री कार्यालय,
बना दिया वहीँ न्यायालय !
कहा - "मंत्री जी ! हमारे आस-पास मुसीबत की लड़ी है
मंहगाई बढ़ी है, पेट्रोल सर चढ़ी है !
धस रहे हैं हमारे पांव,
बचाइए हमारे गाँव,
कुछ तो चलिए दांव !"
प्रधानमंत्री जी बोले -
"हमारे पास नहीं है कोई जादू की छड़ी !
बीत गए अब चुनाव, खुद ही संभालिये अपने गाँव !
गेंद है अब आपके पाले, करने दीजिये अब हमें घोटाले !
अगली बार जब होंगे चुनाव,
तब पार लगायेंगे आपकी नाव !"
अब फिर चुनाव आया है,
सरकार ने काजनीति अपनाया है,
पर अब सजग एवं होशियार है जनता,
क्यूंकि कोई हर बार मूर्ख नहीं बनता !