Wednesday, 24 February 2016

आरक्षण नामक अभिशाप.....

आरक्षण नामक अभिशाप .....  



आरक्षण के सन्दर्भ में आज जिस वीभत्स, घिनौनी और गैर सामाजिक घटना को अंजाम दिया गया है उसके मद्देनजर अब आवश्यक हो गया है की भारत वर्ष के संविधानं से हर प्रकार के आरक्षण की व्यवस्था को अविलम्ब समाप्त कर दिया जाए. अन्यथा भारत का हर तबका निक्कम्मेपन का शिकार हो जाएगा और मुफ्त की रोटी प्राप्त करने के लिए देश के अमूल्य संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचाकर आरक्षण प्राप्त करने के लिए सरकार पर अनावश्यक दवाब बनाने का कुत्सित प्रयास करता रहेगा.

क्षमा चाहता हूँ अपनी धृष्टता के लिए और मै अपने देश के सभी अदूरदर्शी राजनेताओं को एक सलाह देना चाहता हूँ. हे मेरे देश के अदुरदर्शी राजनेताओं जब आप सबने यह सोच ही लिया है की सत्ता पर काबिज होने के लिए आप सब किसी भी हद तक जा सकते हो, यहाँ तक की पाकिस्तान की शरण में भी, तो आप लोगों को मेरी एक सलाह है की "ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और ऐसे ही कुछ अन्य गिने चुने सवर्णों को छोड़कर अन्य तमाम जातियों के सर पर आरक्षण का मुकुट पहना दीजिये". इससे और कुछ हो या न हो परन्तु इतना तो अवश्य ही होगा कि हमारे देश के अनमोल संसाधनों को रह-रह कर आग के हवाले किये जाने से बचाया जा सकता है साथ ही साथ आप लोगों को देश में अशांति फैलाने, सामाजिक विद्वेष पैदा करने आदि में यदा कदा जो श्रम करना पड़ता है वह भी बच जायगा.

No comments:

Post a Comment