!! उल्टा चोर कोतवाल को डांटे !!
Smriti Irani's Answer to Anti-National Congressman
आज कुछ ऐसा ही देखने को मिला संसद के बाहर जब शुश्री मायावती जी ने केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री श्रीमति स्मृति ईरानी पर वादाखिलाफी का इल्जाम लगाया ! जो लोग खुद इतने वर्षों से अपने वायदे पूरे नहीं कर पाये वे दूसरों पर इल्जाम लगा रहे हैं ! शर्म की बात है की ये लोग पहले तो एक देश विरोधी तत्व का समर्थन कर रहे हैं और उसके पश्चात वे उल्टा सरकार को ही घेर रहे हैं ! यह कैसी विडम्बना है , जो लोग अपनी पार्टी के विरोध में बोलने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर देते हैं वो देश के खिलाफ बोलने वाले, आतंकवादियों के समर्थकों के अभिव्यक्ति की आजदी के लिए संघर्ष की बात कर रहे हैं !
इस से भी अधिक आश्चर्य तो मुझे तब हुआ जब कांग्रेस के सांसद श्री ज्योतिराजे सिंधिया ने ये कहा की नारे लगाना या मात्र मौखिक रूप से की गयी टिप्पणी देशद्रोह नहीं कही जा सकती ! श्रीमान सिंधिया आप के लिए देशद्रोह की परिभाषा क्या है ? आप क्या भारत में गृह युद्ध जैसे हालत पैदा करना चाहते हैं ? माननीय सिंधिया जी क्या आपके राजघराने में भी ऐसा ही होता था ? कभी आपने अपने पूर्वजों से पूछा की वो देश व् राजा के विरूद्ध बोलने वालों के साथ किस तरह का व्यवहार करते थे ! अगर नहीं तो यही वक्त है की आप इन चीजों के बारे में जानकारी हासिल करें ! और देशहित में काम करें न की वंशहित में !
श्रीमति स्मृति ईरानी के द्वारा लोक सभा में दिया गया भाषण मात्र विपक्ष को उत्तर नहीं है बल्कि उन सभी करारा तमाचा है जो देश विरोदियों के समर्थन में आ कर सरकार को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं !
अभिव्यक्ति की आजादी एवं पंथनिरपेक्षता की बात कर देश को मजबूत करने की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लोग धर्म व् जाति के नाम पर देश को पिछले ६० वर्षों से बाँट रहे हैं और अंग्रेजों की "DIVIDE AND RULE" की नीति को मानो ध्येय वाक्य सा बनाये हुए हैं !
तत्कालीन परिस्थितियों में मैं उन सभी आतंकवादियों के चमचो और पकिस्तान परस्तों को पाकिस्तान से ही सीखने की सलाह दूंगा जिसने मात्र तिरंगा फहराने के कारण अपने एक नागरिक को वर्षों के लिए सलाखों के पीछे डाल दिया, क्या हमारे देश में ऐसा नहीं हो सकता है? क्या हमारे रगों में खून की जगह पानी दौड़ता है ?? क्या हम देशद्रोहियों को उनके अंजाम तक नहीं पहुंचा सकते हैं !
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