नेताजी की होली
रंग बदलने के कला में निपुण,
रंगबाजी विशेष जिनका गुण !
देश लूटने को मदहोश,
वादों की नौका लिए सफ़ेद पोश !
एक नेताजी होली खेलती भीड़ में शरीक हो गए,
प्रश्न पत्र सा, मानो लीक हो गए !
नोग नेताजी के महान तेवर देख कर चौंके,
इस दृश्य को देख कर कुत्ते भी भौंके !
तभी भीड़ से एक आदमी बोला-
"नेताजी आज बिना मौसम ही आपकी नीयत डोली है,
नेताजी बोले-
"बुरा न मानो होली है !!! "
अबीर-गुलाल से शुरुआत हुई,
पिचकारी भर रंगों के बरसात हुई !
फिर अथिति देवो भवः की गयी सभ्यता निभायी,
मिलकर सबने नेताजी की होली मनाई !
शर्मा जी का बीटा ग्रीज़ का डब्बा लाया,
यादव जी ने पास पड़ा गोबर उठाया !
श्रीवास्तव जी ने और भी किया कमाल,
महीने भर के सड़े टमाटरों का किया इस्तेमाल,
सिंह जी के पोते ने गजब ही कर दिया !
इतने में नेताजी थक कर चूर थे,
पर क्या करते मजबूर थे !
घंटों तक चली पूजा-आरती में,
भक्तगण पीछे और नेताजी आगे !
किसी तरह नेताजी, दुम दबा कर भागे !
रंग छुड़ाने में हुआ और भी बुरा हाल,
फिर भी रह गया कुछ पीला, कुछ नीला,
कुछ कला, कुछ लाल !
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