राजनीति
यह है २१वि सदी,
जहाँ बह रही है राजनीति की नदी !
इस सदी में बदला हा राजनीतिक समीकरण,
कई दलें कर रहीं हैं, एक - दूसरे का अनुकरण !
कोई दल कहे हम हैं 'आप' ,
कोई कहे आप हैं श्राप !
कुछ मंत्री लगाएं जनता दरबार ,
कुछ कहें करें विकास से प्यार !
सबके हैं अपने - अपने वायदे चुनावी,
देखना तो यह है की कौन है सबसे मेधावी !
पर इस बीच कुछ नेता धो रहे हैं , बहती गंगा में हाथ,
कर रहे हैं तीसरे मोर्चे की बात !
सब निकालते हैं बाल की खाल,
कोई नहीं जानना चाहता जनता का हाल !
सवाल करने का भी आखिर क्या है फायदा,
मिलता भी है तो सिर्फ चुनावी वायदा !
जब मंत्रियों में मंत्रालय बटी ,
तब एक ऐसी ही घटना घटी !
लोग पहुंचे प्रधानमंत्री कार्यालय,
बना दिया वहीँ न्यायालय !
कहा - "मंत्री जी ! हमारे आस-पास मुसीबत की लड़ी है
मंहगाई बढ़ी है, पेट्रोल सर चढ़ी है !
धस रहे हैं हमारे पांव,
बचाइए हमारे गाँव,
कुछ तो चलिए दांव !"
प्रधानमंत्री जी बोले -
"हमारे पास नहीं है कोई जादू की छड़ी !
बीत गए अब चुनाव, खुद ही संभालिये अपने गाँव !
गेंद है अब आपके पाले, करने दीजिये अब हमें घोटाले !
अगली बार जब होंगे चुनाव,
तब पार लगायेंगे आपकी नाव !"
अब फिर चुनाव आया है,
सरकार ने काजनीति अपनाया है,
पर अब सजग एवं होशियार है जनता,
क्यूंकि कोई हर बार मूर्ख नहीं बनता !
Good. Let's come to celebrate holi with all of such Netaji.
ReplyDeleteThis can't be done alone I need u, WE need Us to take our country to next level !
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